क्रूड ऑयल की कीमत में गिरावट को देखते हुए भारत ने मार्च के तीसरे सप्ताह से अपने रणनीतिक तेल भंडार को भरना शुरू कर दिया और उम्मीद है कि मई के आखिर तक यह भंडार पूरी तरह से भर जाएगा। तेल भंडार को भरने के लिए तेल की खरीदारी की जाने के बावजूद पिछले कारोबारी साल में देश का तेल आयात खर्च 100 अरब डॉलर से बस थोड़ा ही ज्यादा रहेगा। इससे एक साल पहले यानी 2018-19 के 111.9 अरब डॉलर के तेल आयात खर्च के मुकाबले यह कम ही है।
पिछले कारोबारी साल में 111.3 अरब डॉलर के तेल आयात का अनुमान रखा गया था
पिछले कारोबारी साल (2019-20) में 111.3 अरब डॉलर (23.3 करोड़ टन) के तेल आयात का अनुमान रखा गया था। भारत ने अप्रैल 2019 से फरवरी 2020 तक महज 95.5 अरब डॉलर (20.7 करोड़ टन) के तेल का आयात किया था। यह इससे एक साल पहले की समान अवधि के मुकाबले 7.2 फीसदी (रुपए में 6.6 फीसदी) कम था। मार्च का आधिकारिक आंकड़ा नही आया है। वैश्विक तेल मार्केट रिसर्च कंपनी रिफिनिटिव के मुताबिक भारत ने मार्च 2020 में 2.03 करोड़ टन क्रूड का आयात किया। यह अक्टूबर 2019 के बाद सर्वाधिक मासिक वॉल्यूम है। अप्रैल में भी तेज खरीदारी जारी रही। अप्रैल 2019 से फरवरी 2020 तक भारत ने हर महीने औसत 1.88 करोड़ टन तेल का आयात किया।
भारतीय रिफाइनिंग कंपनियों ने सस्ते क्रूड का सबसे पहले उठाया लाभ
रिफिनिटिव ने कहा कि भारतीय रिफाइनरी कंपनियां सस्ते तेल का सबसे पहले लाभ उठाने वाली कंपनियों में शामिल हैं। भारतीय कंपनियां मध्य पूर्व के सस्ते तेल का भी सबसे पहले लाभ उठाने वालों में शामिल हैं। यदि चालू कारोबारी साल के आखिर तक भारत का क्रूड बास्केट प्राइस करीब 25 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना रहा, तो चालू कारोबारी साल (2020-21) में भारत का क्रूड आयात खर्च 57 फीसदी घटकर 43 अरब डॉलर पर आ जाएगा। यदि ऐसा हुआ तो चालू खाता घाटा के मोर्चे पर देश को काफी राहत मिलेगी। भारतीय बास्केट के क्रूड की औसत कीमत जनवरी में 64 डॉलर प्रति बैरल थी, जो अभी घटकर करीब 20 डॉलर पर आ गई है।
सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियां वैश्विक बाजार से सस्ता क्रूड खरीद कर रणनीतिक भंडार में रख रही हैं
भारतीय बास्केट का प्राइस मार्च में माह-दर-माह आधार पर 39 फीसदी घटकर 33.36 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। भारत में लॉकडाउन के कारण अभी पेट्र्रोलियम उत्पादों की मांग काफी कम है। फिर भी भारतीय रिफाइनिंग कंपनियों ने वैश्विक बाजार से तेल की खरीदारी बढ़ा दी है। माना जा रहा है कि इसे वे स्टोरेज टैंकों में भर रही हैं। इस बीच पेट्रोलियम उत्पादों की घरेलू खपत पिछले कारोबारी साल में 21.37 करोड़ टन रही, जो साल-दर-साल आधार पर जस की तस है। इसका कारण यह है कि लॉकडाउन के कारण मार्च में पेट्रोल व डीजल की बिक्री काफी घट गई।
लॉकडाउन के कारण मार्च के पहले 2 सप्ताह में पेट्र्रोल-डीजल की बिक्री 60 फीसदी घट गई
सरकार के पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल के मुताबिक कारोबारी साल 2019-20 में डीजल की बिक्री 1.1 फीसदी घटकर 8.26 करोड़ टन रही। विमान ईंधन की बिक्री इस दौरान 3.6 फीसदी घटकर 80 लाख टन रही। सूत्रों के मुताबिक मार्च के पहले दो सप्ताह में पेट्रोल व डीजल की बिक्री में 60 फीसदी की गिरावट रही। मार्च के दूसरे दो सप्ताह में बिक्री के और घटने की आशंका है और अप्रैल में भी ऐसी ही स्थिति रही होगी।
अक्टूबर से मार्च तक भारतीय बास्केट की औसत कीमत 66 डॉलर प्रति बैरल रहने का अनुमान था, वास्तविक कीमत 56.7 डॉलर रही
सूत्रों के मुताबिक 53 लाख टन की रणनीतिक भंडारण क्षमता का करीब 60 फीसदी अब तक भर चुका है। सरकारी तेल कंपनियां (ओएमसी) इसे मई के आखिर तक पूरा भर देंगी। अक्टूबर 2019 से मार्च 2020 के बीच भारतीय बास्केट के क्रूड की औसत कीमत 66 डॉलर प्रति बैरल रहने का अनुमान था, जबकि वास्तविक औसत कीमत 56.7 डॉलर प्रति बैरल ही रही।
देश के रणनीतिक तेल भंडारों का ब्योरा
रणनीतिक तेल भंडार विशाखापत्तनम (क्षमता : 13 लाख टन), मेंगलुरु (क्षमता : 15 लाख टन) और पादुर (क्षमता : 25 लाख टन) में स्थित हैं। कारोबारी साल 2017-18 के खपत पैटर्न के मुताबिक तीनों भंडार यदि पूरी तरह से भरें हों, तो इससे देश की 9.5 दिनों की तेल जरूरत पूरी हो सकती है। इसके अलावा 16 मार्च को सरकारी तेल कंपनियों के पास 64.5 दिनों की जरूरत के लिए अतिरिक्त भंडार मौजूद था। रणनीतिक तेल भंडारों में 60 साल तक तेल रखा जा सकता है।
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