फिच रेटिंग्स ने 2020-21 में भारत की जीडीपी ग्रोथ का अनुमान घटाकर 0.8% कर दिया है। रेटिंग एजेंसी का कहना है कि कोरोना वायरस और लॉकडाउन की वजह से दुनिया मंदी की चपेट में है। फिच ने ग्लोबल इकोनॉमिक आउटलुक में कहा है कि अप्रैल-जून और जुलाई-सितंबर तिमाही में ग्रोथ निगेटिव रहेगी। इससे पूरे साल की ग्रोथ प्रभावित होगी। हालांकि, 2021-22 में ग्रोथ रेट 6.7% रहने का अनुमान जताया है।
वैश्विक ग्रोथ का अनुमान घटाकर 3.9% किया
फिच का अनुमान है कि अक्टूबर-दिसंबर में जीडीपी ग्रोथ 1.4% रहेगी। उपभोक्ता खर्च 5.5% से घटकर 0.3% रहने और निवेश में 3.5% कमी आने की आशंका को देखते हुए पूरे साल की ग्रोथ के अनुमान में कटौती की गई है। फिच ने इस साल वैश्विक जीडीपी ग्रोथ का अनुमान भी घटाकर 3.9% कर दिया है। रेटिंग एजेंसी का कहना कि इस बार वैश्विक मंदी 2009 की मंदी से दोगुनी होगी।
चीन की ग्रोथ भी इस साल 1% से कम रहेगी
फिच के मुताबिक ग्लोबल जीडीपी में गिरावट से 2019 की ग्लोबल इनकम के मुकाबले 2.8 ट्रिलियन डॉलर का नुकसान होगा। वहीं कोरोना से पहले के जीडीपी अनुमान के मुकाबले 4.5 ट्रिलियन डॉलर का नुकसान होगा। कोरोना की वजह से सभी देशों पर आर्थिक असर होगा। चीन और भारत की ग्रोथ 1% से भी कम रहेगी। मैक्सिको, ब्राजील, रूस, दक्षिण अफ्रीका और तुर्की की ग्रोथ के अनुमान में भी कमी की गई है।
दूसरी छमाही में कच्चे तेल के भाव में सुधार होगा
रेटिंग एजेंसी का कहना है अभी कई देशों ने लॉकडाउन को आगे बढ़ा दिया है। भारत में 3 मई तक लॉकडाउन है। लेकिन, आगे सप्लाई सुधरने और लॉकडाउन में राहत मिलने से इस साल की दूसरी छमाही में कच्चे तेल की कीमतों को सपोर्ट मिलेगा। मांग घटने की वजह से तेल की कीमतों में इन दिनों तेज गिरावट देखी जा रही है।
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